Digital Addiction क्या है और इसके क्या दुष्प्रभाव होते है | What Is Digital Addiction?



हेलो दोस्तों!! इस पोस्ट में हम बात करेंगे कि Digital Addiction क्या है और इसके क्या दुष्प्रभाव होते है? जिस तरह से digital devices हमारे रोजमर्रा के काम को आसान बना रहे है उसी तरह इनका लगातार इस्तेमाल हमे बीमार भी बना रहा है और यह कई तरह के addiction(विकार) उत्पन्न कर रहा है। 
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Digital Addiction क्या है और इसके क्या दुष्प्रभाव होते है
एक रिसर्च मुताबिक एक स्टूडेंट एक दिन में औसतन 150 बार से ज्यादा अपना मोबाइल डिवाइस चेक करता है। टेक्नोलॉजी की ऐसी लत के कारण कुछ ऐसे digital addiction हमारे अंदर उत्पन्न होने लगते है जिनका हमे पता भी नहीं चलता है और धीरे धीरे ये गंभीर बीमारियों का कारण बनते है। इस तरह हम यह कह सकते है कि Digital Addiction डिजिटल डिवाइस के कारण होने वाला विकार है। 
तो आइये अब हम यह जानते है कि Digital Addiction के कारण क्या दुष्प्रभाव होते है? 


Digital Addiction के दुष्प्रभाव :

FAD - Facebook Addition Disorder-

इसका मतलब ये है कि ऐसे लोगो को फेसबुक की भयंकर लत पड़ चुकी है। जो लोग फेसबुक पर लगातार pictures पोस्ट करते रहते है और हर वक्त जिनको अपने दोस्तों की पोस्ट का बेसब्री से इंतजार रहता है तो इसका मतलब है कि ऐसे लोगो पर Facebook Addition Disorder हावी है। ऐसे लोग हमेशा अपने आप को फेसबुक पर सबसे ज्यादा अपडेट रखना चाहते है जिसके कारण ये लोग अपने द्वारा शेयर की गयी पिक्चर पोस्ट की रेटिंग भी दूसरे सोशल मीडिया यूजर के response के आधार पर ही करने लग जाते है। एक शोध के अनुसार सबसे ज्यादा फैड स्तर चीन में और सबसे कम पोलैंड में वर्णित किया हैं।फैड के कारण मानसकि रूप से अवसाद, चिंता, थकान और तनाव के लक्षण दिखाई देने लगते है। 


IGD- Internet Gaming Disorder-

जैसा कि नाम से पता चल रहा है कि यह एक इंटरनेट गेमिंग से जुड़ा हुआ विकार है। तो आपको बता दे कि यह विकार ऐसे लोगो को ज्यादा होता है जिनको दिनभर या ज्यादा देर तक अपने मोबाइल में candy crush या fifa जैसे ऑनलाइन गेम खेलने की आदत होती है। अगर आपको भी जरुरत से ज्यादा ऑनलाइन गेम खेलने की तीव्र इच्छा या होती है या आपको दूसरे सोशल मीडिया यूजर को ऐसे ऑनलाइन गेम्स खेलने की रिक्वेस्ट भेजने की आदत है तो समझ लीजिये कि आपको भी Internet Gaming Disorder हो चुका है। यह विकार सामान्यतः 12 से 20 वर्ष तक के किशोरों में ज्यादा होता है। 


FOMO- Fear of Missing Out:

Fear of Missing Out का अर्थ होता है कि सोशल मीडिया पर आपसे कुछ भी छूट न जाये। कुछ लोग हर वक्त लगातार सोशल मीडिया पर अपडेट रहना चाहते है। ऐसे में ये लोग बार बार अपना मोबाइल चेक करते रहते है कि सोशल मीडिया की नई अपडेट क्या आयी है। उनमे हमेशा ये डर कि यदि वो ऐसा नहीं करेंगे तो वे दूसरो से पिछड़ जायेंगे। इसलिए ऐसे लोग हर एक अपडेट पर तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देने की कोशिश करते है जैसे प्रत्येक नई अपडेट पर तुरंत like, comment या share करने के लिए उतावलापन दिखाते है और वे बिना समय गवाए ऐसा करना चाहते है। यदि आपको भी ऐसा करने की आदत है तो समझ लीजिये की आप भी FOMO के शिकार हो रहे है। 


PVS- Phantom Vibration Syndrome:

यह एक ऐसा विकार है जिसमे आपको कुछ ऐसा लगता है कि जैसे आपका फ़ोन vibrate कर रहा हो। पर जब आप अपना फ़ोन चेक करते है तो पता चलता है की यह तो आपका वहम है क्यूंकि वास्तव में तो ऐसा हुआ ही नहीं है। यानि फ़ोन के ना बजने पर भी ऐसा एहसास होना कि आपका फ़ोन vibrate कर रहा है। ऐसी स्तिथि में आप बार बार अपना फ़ोन चेक करते रहते हो। 

PVS होने का मुख्य कारण ये होता है कि आपको हमेशा ये डर रहता है कि कही आपसे कोई कॉल या मैसेज छूट न जाये। इस डर के कारण आप हमेशा जरुरत से ज्यादा सजग रहने लगते है और आपको थोड़े थोड़े अंतराल में ऐसा अहसास होता रहता है कि जैसे आपका फ़ोन बज रहा हो या vibrate कर रहा हो जबकि वास्तव में ऐसा बिलकुल नहीं हो रहा होता है। 


Selfitis(सेल्फीटिस):

यह एक ऐसा विकार है जिसमे लोगो को ज्यादा से ज्यादा सेल्फी पोस्ट करने की आदत होती है। कुछ लोग अपने मोबाइल और सोशल मीडिया का यूज़ सिर्फ सेल्फी पोस्ट करने के लिए ही करते है। ऐसे में वे हर वक्त अपने मोबाइल से सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सप आदि) पर अपलोड करते रहते है। 


Nomophobia(नोमोफोबिया):

जब हमे अपने मोबाइल से कुछ ज्यादा ही लगाव होने लगता है। नोमोफोबिया भी एक ऐसा ही विकार है जिसके अंतर्गत हमे अपने device को लेकर कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद होने लगते है और अक्सर ऐसा डर बना रहता है कि कही मोबाइल की बैटरी लो ना ही जाए, कही बैलेंस खत्म न हो जाये और कभी तो इस बात पर भी बेचैन हो उठते है की मोबाइल में सिग्नल कमजोर क्यों आ रहे है आदि। इस कारण हम बिना बात के परेशान होते रहते है और इससे हमारे दूसरे काम भी प्रभावित होने लगते है। 

अंतिम शब्द:
तो दोस्तों अब आपको पता चल गया होगा कि Digital Addiction क्या है और इसके क्या दुष्प्रभाव होते है। और में इसके बारे में यही कहना चाहूंगा कि यदि हम अपने डिजिटल डिवाइस का अत्यावश्यक और सिमित उपयोग करे तो कुछ हद तक इन दुष्परिणामो से बचा जा सकता है। 
आपको यह आर्टिकल कैसा लगा और इस पोस्ट के बारे में आपकी क्या राय है। इसके लिए हमे comment करके जरूर बताये। 
धन्यवाद। 

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